कितना तन्हा है तुमसे बिछड़कर ये सफर । ढूंढती रहती है तुम्हें मेरी ये प्यारी नज़र ॥ हर दिन उदास है मेरा , रातें वीरान मेरी । क्या तुझे इल्स है ये , क्या तुम्हें है ये खबर । तुमको चाहा है बहुत , मैंने पूजा है तुम्हें । ऐ मेरी जाने ग़ज़ल , जाने वफा , जाने जिगर । रास्ते खो गये हैं मेरे , गुम हुई मंजिलें मेरी । राहजन हजारों हैं खड़े , कोई नहीं है राहबर ।। आशकी जुनूं थी मेरी , हश होना था यही । दिल रात दिन तड़ये , आंखे रोये तुम उमर भर || और दूर जाने वाले ज़रा , इतना बता दे मुझको । है नगर कौन का तेरा , हैं कहां तेरा घर ।। जख्में दिल का मरहुम सारे जमाने में नहीं थक गये करके इलाज , शहर के चारागर ॥ मुझसे होकर जुदा , खुश रहो तुम सदा । मैं दुआ मांगता हूं , अक्सर शामो सहर । वक्त ' आजाद ' अब किसी तरह कटता नहीं । बहार आ जाये गर हो , ईधर से उनका गुजर ।।